चौसा थर्मल पावर प्लांट रेलवे लाइन पर किसानों का विरोध: बक्सर में बिना सहमति और जॉइंट सर्वे के पिलरिंग का आरोप – Buxar News
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बक्सर के चौसा में निर्माणाधीन थर्मल पावर प्लांट तक रेलवे लाइन बिछाने के कार्य को लेकर बुधवार को किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि बेचनपुरवा, केसाइफन और बालाबान इलाकों के खेतों में बिना पूर्व सूचना और संयुक्त सर्वे के ही रेलवे लाइन
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स्थानीय किसान अंशु चौबे ने बताया कि कंपनी के प्रतिनिधि और ठेकेदार खेतों में सीमांकन का कार्य कर रहे थे, जबकि किसानों के साथ अब तक कोई आधिकारिक वार्ता नहीं हुई है। उनका कहना था कि न तो जमीन की विधिवत मापी की गई है और न ही संयुक्त सर्वे कराया गया है। ऐसे में रेलवे अलाइनमेंट तय कर पिलर लगाने का प्रयास नियमों के विरुद्ध है।
नियम-कानूनों को नजरअंदाज कर काम करने का प्रयास
किसानों ने आरोप लगाया कि कंपनी और उसके ठेकेदार लगातार नियम-कानूनों को नजरअंदाज कर काम करने का प्रयास कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन भी इस मामले में कंपनी का सहयोग कर रहा है, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ रही है। किसानों ने स्पष्ट किया कि जब तक उचित मुआवजा, वार्ता और सहमति की प्रक्रिया पूरी नहीं होगी, तब तक किसी भी प्रकार का कार्य नहीं होने दिया जाएगा।
दरअसल, चौसा में 1320 मेगावाट क्षमता वाले थर्मल पावर प्लांट का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें 660-660 मेगावाट की दो यूनिट शामिल हैं। इनमें से एक यूनिट पहले ही चालू हो चुकी है, जबकि दूसरी यूनिट को जल्द शुरू करने के लिए तेजी से काम चल रहा है। वर्तमान में प्लांट तक कोयला पहुंचाने के लिए रेलवे स्टेशन से ट्रकों का उपयोग किया जा रहा है।
सीमांकन और पिलरिंग का कार्य किया जा रहा था
हालांकि, स्थायी व्यवस्था के तहत सीधे प्लांट तक रेलवे लाइन बिछाने की योजना पर काम शुरू किया गया है। इसी परियोजना के तहत जमीन पर सीमांकन और पिलरिंग का कार्य किया जा रहा था, जिसका किसानों ने विरोध किया।
मौके पर पहुंचे किसानों ने चेतावनी दी कि यदि बिना बातचीत और सहमति के जबरन कार्य कराने का प्रयास किया गया तो बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। फिलहाल किसानों के विरोध के बाद रेलवे लाइन से संबंधित पिलरिंग का कार्य रोक दिया गया है।
















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