Published On: Thu, May 21st, 2026

महिला के घर से मिला दूसरा बच्चा भी चोरी का: आद्विक केस की जांच में खुला राज, 4 साल पहले मंदिर से चुराई थी; असली मां मान बैठा था मासूम – Gaya News




ओरंगाबाद के ओबरा देवी मंदिर से किडनैप मासूम आद्विक को 16 मई को गयाजी पुलिस ने सुरक्षित बरामद कर दिया। आद्विक को उसके परिजन से मिलाने के बाद पुलिस ने महिला के घर से मिले दूसरे बच्चे की गुत्थी भी सुलझा ली है। यह बच्चा भी चोरी का निकला है। चार साल पहले साल 2022 में वट सावित्री पूजा के ही दिन दी ही मंदिर से महिला रंजू देवी बहलाकर ले भागी थी। आद्विक के अपहरण मामले की जांच के दौरान पुलिस को जो शक हुआ था, वह अब सही साबित हो गया है। बीते मंगलवार के दिन मगध रेंज के आईजी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आद्विक की बरामदगी की जानकारी डेल्हा थाना क्षेत्र खरखुरा से होने की दी थी। उसी दिन उन्होंने यह आशंका जताई थी कि महिला रंजू देवी के पास मिला दूसरा बच्चा भी चोरी का हो सकता है। आईजी ने तब कहा था कि पुलिस इस दिशा में गंभीरता से जांच कर रही है। हालांकि डेल्हा पुलिस मंगलवार की रात तक इस बात से इनकार कर रही थी, लेकिन ओबरा थाने की पुलिस की जांच पूरी होने के बाद यह खुलासा हो गया है कि दूसरा बच्चा भी चोरी का ही था। 4 साल पहले मंदिर से ले भाई थी दरअसल, छापेमारी के दौरान महिला रंजू देवी के घर से एक आठ साल का बच्चा शिवा पांडे भी मिला था। उस समय महिला उसे अपना बेटा बता रही थी। लेकिन पुलिस को उसके व्यवहार पर शुरू से शक था। इसी शक के आधार पर बच्चे की पहचान और पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए। ओबरा थाने में दर्ज 4 साल पहले बच्चे की गुमशुदगी का रिकार्ड खंगाला गया तो जांच और शक गहराता चला गया। खास बात यह कि महिला ने शिवा पांडे को भी ओबरा के उसी मंदिर से चुराया था, जहां से आद्विक को चुराया था। इस दिन भी वट सावित्री व्रत का ही दिन था। पिता दिल्ली में मजदूरी करते हैं शिवा ओबरा निवासी शिवम पांडेय का बेटा है। चार साल पहले उसके गायब होने के बाद परिवार ने काफी खोजबीन की थी, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला था। उस समय ओबरा पुलिस के सुस्त रवैये से निराश परिवार दिल्ली चला गया था। जहां शिवम पांडेय मजदूरी का काम करते हैं। चार साल के बाद परिवार में खुशी का माहौल पुलिस अधिकारियों के अनुसार, चार साल तक रंजू देवी के साथ रहने के कारण शिवा अपने असली माता-पिता को लगभग भूल चुका था। वह रंजू देवी को ही अपनी मां मानने लगा था। पुलिस ने पुराने फोटो और परिवार की तस्वीरें दिखाकर धीरे-धीरे बच्चे को उसकी असली पहचान से जोड़ने की कोशिश की। इसके बाद पूरा मामला साफ हो गया। बेटे के मिलने की खबर मिलते ही परिवार के लोग गया पहुंचे। बच्चा नहीं होने से परेशान थी, पति साथ नहीं रहते पूछताछ में रंजू देवी ने पुलिस को बताया कि उसकी शादी कोंच थाना क्षेत्र के खजुरी मंजाठी निवासी रविंद्र पासवान से हुई थी। शादी के कई साल बाद भी बच्चा नहीं होने पर उसके पति ने दूसरी शादी कर ली। इसके बाद वह डेल्हा में किराए के मकान में अकेली रहने लगी। उसका पति शिक्षक था। अकेलेपन और बच्चा नहीं होने की टीस उसके मन में थी। उसने पहले बच्चा गोद लेने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुई। इसके बाद उसने भीड़भाड़ वाले मंदिरों से बच्चों को चुराने की योजना बनाई। चार साल तक बच्चे को अपने साथ रखी पुलिस के अनुसार, इसी योजना के तहत वह साल 2022 में वट सावित्री पूजा के दिन ओबरा देवी मंदिर पहुंची थी और पूजा में व्यस्त महिलाओं के बीच से चार साल के शिवा को लेकर भाग गई थी। इसके बाद चार साल तक उसे अपने बच्चे की तरह पालती रही। अब आद्विक केस की जांच में ही इस पूरे राज से पर्दा उठ गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अगर जांच सही दिशा में नहीं बढ़ती, तो शायद शिवा का सच कभी सामने नहीं आ पाता। इधर पुलिस विभाग के एक्सपर्ट जांच अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की हरकत करने वाली महिला साइको होती है।



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