Published On: Thu, May 7th, 2026

टाटा संस की लिस्टिंग पर टाटा ट्रस्ट्स में मतभेद: नोएल टाटा IPO के खिलाफ, दो ट्रस्टी लिस्टिंग के पक्ष में; 8 मई को हो सकता है फैसला




टाटा ग्रुप की पेरेंट कंपनी ‘टाटा संस’ को शेयर बाजार में लिस्ट करने के मुद्दे पर ग्रुप के टॉप मैनेजमेंट में मतभेद गहरे हो गए हैं। टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा इस लिस्टिंग के खिलाफ हैं, जबकि ट्रस्ट के दो बड़े सदस्य आरबीआई के नियमों का हवाला देते हुए आईपीओ लाने के पक्ष में हैं। इस पूरे विवाद और इसके असर को समझने के लिए पढ़ें यह QA: 1. टाटा ग्रुप में विवाद की मुख्य वजह क्या है? टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की दो-तिहाई हिस्सेदारी है। विवाद की जड़ ‘टाटा संस’ का IPO है। टाटा ट्रस्ट्स के दो ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह चाहते हैं कि टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाए। उनका मानना है कि इससे कंपनी में पारदर्शिता आएगी। वहीं, नोएल टाटा अभी भी टाटा संस को ‘क्लोजली हेल्ड’ यानी निजी कंपनी ही बनाए रखना चाहते हैं। 2. लिस्टिंग को लेकर RBI का नया नियम क्या कहता है? RBI के नए नियमों के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से टाटा संस को एक ‘सिस्टमैटिकली इम्पोर्टेन्ट’ शैडो बैंक (NBFC) माना जाएगा। नियम यह है कि अगर किसी शैडो बैंक की एसेट साइज 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है, तो उसे शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है। टाटा संस इस दायरे में आती है। 3. क्या टाटा ग्रुप ने पहले भी लिस्टिंग से बचने की कोशिश की है? हां, यह पहली बार नहीं है। 2022 में भी RBI ने टाटा संस को ‘अपर-लेयर’ NBFC की श्रेणी में रखा था और तीन साल का समय दिया था। तब ग्रुप ने अपना कर्ज रीस्ट्रक्चर करके और खुद को ‘नॉन-सिस्टमैटिक’ बताकर लिस्टिंग टाल दी थी। लेकिन अब RBI ने वे रास्ते बंद कर दिए हैं। 4. 8 मई की बोर्ड मीटिंग में क्या होने की उम्मीद है? 8 मई को टाटा ट्रस्ट्स की एक अहम मीटिंग होने वाली है। सूत्रों के मुताबिक, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह इस मीटिंग में आधिकारिक तौर पर लिस्टिंग की तैयारी शुरू करने का प्रस्ताव रख सकते हैं। इसके अलावा, टाटा संस के बोर्ड में नए ट्रस्टी नॉमिनी चुनने पर भी चर्चा होगी। 5. नोएल टाटा लिस्टिंग का विरोध क्यों कर रहे हैं? टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की दो-तिहाई हिस्सेदारी है। नोएल टाटा को डर है कि लिस्टिंग होने से ग्रुप की कंपनियों पर टाटा ट्रस्ट्स का कंट्रोल कम हो सकता है। वह चाहते हैं कि टाटा संस पर ट्रस्ट की पकड़ पहले जैसी ही मजबूत बनी रहे। फरवरी में ऐसी खबरें भी आई थीं कि उन्होंने टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन से इस बात की गारंटी मांगी थी कि कंपनी लिस्ट नहीं होगी। 6. चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का इस पर क्या स्टैंड है? रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन से लिस्टिंग न होने की गारंटी मांगी, तो उन्होंने ऐसा वादा करने से इनकार कर दिया। उनका तर्क था कि यह रेगुलेटरी मामला है। इसी वजह से चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल के री-अपॉइंटमेंट पर वोटिंग भी टल गई थी। 7. क्या RBI टाटा ग्रुप को कोई खास छूट दे सकता है? इसकी संभावना बहुत कम है। RBI ने अनौपचारिक रूप से संकेत दिए हैं कि वह टाटा ग्रुप के लिए नियमों में कोई अपवाद नहीं बनाएगा। रेगुलेटर का मानना है कि अगर टाटा को छूट दी गई, तो दूसरी कंपनियां भी ऐसी ही मांग करेंगी, जिससे बैंकिंग नियम कमजोर पड़ेंगे। 8. अगर टाटा संस का IPO आता है, तो सबसे ज्यादा फायदा किसे होगा? इसका सबसे बड़ा फायदा ‘शापूरजी पालोनजी (SP) ग्रुप’ को होगा। मिस्त्री परिवार के पास टाटा संस की 18.4% हिस्सेदारी है। शापूरजी पालोनजी ग्रुप भारी कर्ज में है और उन्होंने अपनी यह हिस्सेदारी गिरवी रखी है। लिस्टिंग होने से उनके हिस्से की वैल्यू अनलॉक होगी और वे अपना कर्ज चुका पाएंगे। 9. शापूर मिस्त्री परिवार की नेटवर्थ पर इसका क्या असर पड़ेगा? ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक, SP ग्रूप को चलाने वाले शापूर मिस्त्री की नेटवर्थ करीब 32 अरब डॉलर है। खास बात यह है कि उनकी इस दौलत का 75% हिस्सा टाटा संस की हिस्सेदारी में फंसा हुआ है, जिसे वे अभी बेच नहीं सकते। लिस्टिंग उनके लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगी। 10. आगे क्या होने वाला है? अगले दो महीनों में तस्वीर साफ हो जाएगी। टाटा संस फिलहाल रेगुलेटर से अनौपचारिक सलाह ले रहा है और समय सीमा बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। अगर 8 मई की मीटिंग में ट्रस्टी हावी रहते हैं, तो भारत के कॉरपोरेट इतिहास का सबसे बड़ा IPO देखने को मिल सकता है। नॉलेज पार्ट:



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