रूस से कच्चा तेल खरीदता रहेगा भारत: सरकार ने कहा- अमेरिकी प्रतिबंधों से फर्क नहीं, मई में रोजाना खरीदा 23 लाख बैरल क्रूड
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नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले
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सोमवार को पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने देश में पेट्रोल-डीजल और LPG की सप्लाई की जानकारी दी।
अमेरिका की तरफ से मिलने वाली प्रतिबंधों की छूट खत्म होने के बाद भी भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने सोमवार को प्रेस ब्रीफिंग में साफ किया कि रूस से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की खरीद आगे भी जारी रहेगी।
अमेरिकी प्रतिबंधों की छूट खत्म होने से भारत के इम्पोर्ट प्लान पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि भारत का यह फैसला किसी देश की रियायत पर नहीं, बल्कि शुद्ध रूप से व्यापारिक सूझबूझ और देश के आर्थिक हित पर आधारित है।
कच्चे तेल की पर्याप्त सप्लाई का इंतजाम है
उन्होंने कहा कि भारत का रुख इस मामले में हमेशा से साफ रहा है। भारत अमेरिकी छूट मिलने से पहले भी रूस से तेल खरीद रहा था, छूट के दौरान भी खरीदा और आगे भी इसे जारी रखेगा। सरकार ने देश की जरूरत के मुताबिक पहले ही कच्चे तेल की पर्याप्त सप्लाई का इंतजाम कर लिया है, इसलिए देश में क्रूड ऑयल की कोई कमी नहीं है।
आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने मई महीने में रूस से रिकॉर्ड 23 लाख बैरल प्रति दिन कच्चे तेल का आयात किया है।

16 मई को खत्म हो चुकी है अमेरिका की दी हुई मोहलत
यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत ने अमेरिका से रूसी तेल आयात पर छूट की समयसीमा बढ़ाने की मांग की है। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट में सप्लाई काफी प्रभावित हुई है।
वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें काबू में रखने और सप्लाई बनाए रखने के लिए अमेरिका ने मार्च में एक छूट जारी की थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 16 मई तक के लिए वैध किया गया था। हालांकि, रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही वाशिंगटन लगातार भारत पर इस बात का दबाव बनाता रहा है कि वह रूस से डिस्काउंट पर तेल खरीदना कम करे।

घरेलू बाजार में महंगाई रोकने के लिए सप्लाई जरूरी
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अधिकारियों ने अमेरिकी प्रशासन को स्पष्ट कर दिया था कि ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव के बीच देश की तेल सप्लाई को बनाए रखना सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है। अधिकारियों ने चेतावनी भी दी थी कि अगर तेल की सप्लाई में कोई रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। इससे देश में डोमेस्टिक कुकिंग गैस (LPG) जैसी जरूरी चीजों की किल्लत और महंगाई बढ़ सकती है।
हालांकि, इस पूरे मामले पर भारत के तेल मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी।
मई में रूस से तेल आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा
अमेरिकी छूट की डेडलाइन खत्म होने से पहले भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने रूस से कच्चे तेल की खरीद काफी तेज कर दी है। डेटा इंटेलिजेंस एजेंसी केपलर के आंकड़ों के मुताबिक, मई महीने में अब तक भारत का रूसी तेल आयात रिकॉर्ड 23 लाख बैरल प्रति दिन के स्तर पर पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। विश्लेषकों का अनुमान है कि पूरे मई महीने का औसत आयात भी करीब 19 लाख बैरल प्रति दिन के आसपास रहने वाला है।
भारत ऊर्जा जरूरतों के लिए रूसी तेल खरीदता रहा है
पिछले साल नवंबर में यूक्रेन के साथ जंग के चलते ट्रम्प प्रशासन ने रूसी तेल कंपनियों लुकोइल और रोजनेफ्ट पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद जनवरी में भारत का रूसी तेल आयात गिरकर 11 लाख बैरल प्रति दिन रह गया था, जो नवंबर 2022 के बाद सबसे कम था।
हालांकि, फरवरी में यह हिस्सेदारी फिर से बढ़कर 30% तक पहुंच गई है। भारत लगातार अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदता रहा है।

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ईरान-इजराइल में जारी जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज रूट बंद हो गया है। ऐसे में कच्चे तेल की सप्लाई बंद होने के बाद भारत करीब 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल रूस से खरीदेगा।
यह दावा ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट में बताया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों ने रूस से तेल के एग्रीमेंट किए हैं।
हाल ही में अमेरिका ने समुद्र में फंसे रूसी तेल के शिपमेंट्स खरीदने के लिए भारत को 30 दिन (3 अप्रैल तक) की छूट देने का दावा किया था। पूरी खबर पढ़ें…

















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