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हर्षित शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Wed, 11 Sep 2024 05:00 AM IST
हिमाचल प्रदेश में नदियों में जल गुणवत्ता कई स्थानों पर राष्ट्रीय मानकों से नीचे गिर चुकी है। इसका खुलासा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी वार्षिक रिपोर्ट में हुआ है।
सांकेतिक तस्वीर। – फोटो : AI
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ब्यास, सतलुज, यमुना, गिरी, सिरसा और अन्य नदियों में जल गुणवत्ता कई स्थानों पर राष्ट्रीय मानकों से नीचे गिर चुकी है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी वार्षिक रिपोर्ट में प्रदेश की प्रमुख नदियों में बढ़ते जल प्रदूषण की गंभीर स्थिति सामने आई है। इसके अनुसार प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 210.5 मिलियन लीटर प्रदूषित पानी उत्पन्न हो रहा है। प्रदेश में स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की क्षमता मात्र 119.5 मिलियन लीटर प्रतिदिन है। इसमें से भी केवल 80.8 मिलियन लीटर का ही सही ढंग से निदान हो पा रहा है। करीब 129.7 मिलियन लीटर गंदा पानी प्रतिदिन बिना शोधन के नदियों में बहाया जा रहा है। प्रदूषण के मुख्य कारणों में शहर और औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला गंदा पानी, आंशिक रूप से शुद्ध किया गया सीवरेज और कृषि से निकलने वाला रासायनिक कचरा शामिल है।
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ब्यास नदी में लगातार गिर रही गुणवत्ता
रिपोर्ट के अनुसार ब्यास नदी की जल गुणवत्ता में लगातार गिरावट आ रही है। मनाली के ऊपर की ओर स्थित हिस्सों में पानी की गुणवत्ता अपेक्षाकृत ठीक पाई गई है लेकिन मनाली के नीचे के हिस्सों में यह बेहद खराब हो चुकी है। यहां की जल गुणवत्ता को सी श्रेणी में रखा गया है। नदी में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा खतरे के स्तर से अधिक पाई गई है। यह बैक्टीरिया मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।