Published On: Sun, May 24th, 2026

मोबाइल का दीवाना नाबालिग बना पाकिस्तानी जासूस: ‘बच्चा है, क्या करेगा?’ गांव वाले अभी भी नहीं मान रहे, ATS ने पकड़ा डिजिटल स्पाई – Muzaffarpur News




मुजफ्फरपुर शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर…एक शांत और पिछड़ा गांव रतनपुरा। जहां की सुबह अमूमन खेतों की सोंधी महक और मकई सुखाती महिलाओं की गपशप से शुरू होती थी। लेकिन 22 मई की सुबह ऐसी आई, जिसने पूरे गांव को देश की सबसे बड़ी सुर्खियों में ला खड़ा किया। गांव के 17 साल के एक लड़के पर आरोप है कि उसने पैसे के लिए पाकिस्तान को भारत की खुफिया जानकारियां भेजी है। रतनपुरा गांव की गलियों में आजकल अजीब सी खामोशी है, जो सिर्फ दबी-छुपी फुसफुसाहटों से टूटती है। गांव के एक कोने में मकई सुखाती महिला बिना कैमरा देखे कहती है… ‘जहां आग होती है, वहीं धुआं उठता है। बिना कुछ किए तो पुलिस किसी को नहीं पकड़ेगी।’ वहीं पास खड़ा एक उम्रदराज शख्स इस बात को मानने से इनकार करता है, ‘अरे! अभी तो बच्चा है, खुद खाने का होश नहीं… वह क्या ही करेगा?’ लेकिन गांव के युवाओं को हकीकत का अंदाजा है। स्मार्टफोन और इंटरनेट के इस दौर ने सरहदों की दूरियां मिटा दी हैं। नाबालिग की गिरफ्तारी के बाद भास्कर रिपोर्टर रतनपुरा गांव पहुंचा। ऑन कैमरा कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं था, लेकिन ऑफ कैमरा सब बताया। पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट…। गांव के ही एक किशोर ने बताया कि आरोपी लड़का बचपन से ही मोबाइल का शौकीन था। स्कूल आते-जाते उसके हाथ में हमेशा फोन होता था और वह इंस्टाग्राम व टेलीग्राम जैसी सोशल मीडिया ऐप्स पर घंटों बिताया करता था। मोहम्मद सगीर, जो गांव में एक छोटी सी पान की दुकान चलाकर अपने परिवार का पेट पालते हैं, उनके दो बेटों में यह छोटा था। बड़ा बेटा मदरसे में पढ़ता था और छोटा गांव के ही उर्दू विद्यालय में। 8वीं तक पढ़ने के बाद उसने स्कूल जाना छोड़ दिया। पिता ने 9वीं में दाखिला तो कराया, लेकिन उसका मन किताबों से ज्यादा मोबाइल की स्क्रीन में रमता था। नवंबर में दिल्ली कमाने गया था गांव वालों के मुताबिक, बीते साल 4 नवंबर को वह पहली बार गांव से बाहर निकला। उसने घर पर कहा कि वह दिल्ली की एक फैक्ट्री में काम करने जा रहा है। किसी को अंदाजा नहीं था कि दिल्ली के इस सफर में या सोशल मीडिया की अनजान गलियों में उसकी मुलाकात सरहद पार के किसी काले साये से होने वाली है। ATS ने की डिजिटल रेकी, इसके बाद किया अरेस्ट ATS की तकनीकी टीम पिछले काफी समय से डिजिटल स्पेस में एक संदिग्ध हलचल पर नजर रखे हुए थी। जांच एजेंसियों को पुख्ता इनपुट मिला था कि बिहार के एक सुदूर गांव से भारत के बेहद संवेदनशील और रणनीतिक सैन्य ठिकानों की जानकारियां सरहद पार भेजी जा रही हैं। पिता बोले- मुझे भरोसा नहीं, निष्पक्ष जांच हो बिहार ATS के ADG पंकज दराद के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ पुख्ता डिजिटल सबूत मिले हैं और कोर्ट के आदेश के बाद उसे जेल भेज दिया गया है। इधर, रतनपुरा गांव में पान की दुकान चलाने वाले पिता सगीर सदमे में हैं। वे कहते हैं, ‘पुलिस ने कहा था कि पूछताछ के लिए ले जा रहे हैं, कोई विशेष बात नहीं है। मैंने साथ जाने को कहा तो उन्होंने मना कर दिया। मेरा बेटा तो सिर्फ 17 साल का है, मुझे अब भी भरोसा नहीं हो रहा।’ पिता अब सिर्फ एक ही मांग कर रहे हैं- मामले की निष्पक्ष जांच हो।



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